किताबों की दुनिया : समय, संस्कार, ज्ञान और सभ्यता को संजोए हुए एक ब्रह्मांड

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साहित्य एवं सम्पादकीय: Book Reading: बीते दिनों की बात याद आती है मुझे। मैं अपने एक मित्र के संग बैठा था। मेरे मन में अजीबो-गरीब सवाल उमड़ रहे थे तब। तो मैं अपने मित्र से बोल बैठा — भाई, एक सवाल है मन में, पूछूं? क्या तू उत्तर दे पाएगा? उसने भी बड़ी जिज्ञासा भरी शैली में मुझसे कहा — अरे बिल्कुल पूछ भाई, न दे पाया तो मिलकर उत्तर ढूंढ लेंगे। मुझे उसकी बात सुन कुछ संतुष्टि के भाव प्राप्त हुए और हंसी भी आई।

फिर मैंने उससे कहा — अच्छा ये बता कि गुनाहों का देवता जब गबन करके अक्टूबर जंक्शन आया होगा, तो उसने दीवार पर जो खिड़की थी, उसमें क्या देखा होगा? उसने एक मिनट तक मेरी ओर गौर से देखा। फिर मुझसे पूछा “यार, आजकल तेरी तबीयत तो ठीक है न?” मैंने कहा — “हाँ, पर तू ऐसा क्यों पूछ रहा है? अच्छा वो छोड़, मेरे सवाल का उत्तर दे पहले।”

उसने बिगड़ते हुए कहा — “मैं ये इसलिए पूछ रहा हूँ क्योंकि तू आजकल कैसी बेतुकी बातें करने लगा है। क्या कह रहा था गुनाहों का देवता गबन किया — आखिर है कौन ये सब? पता नहीं क्या-क्या कहने लगा है। आजकल।” मैं उसके डरे और बिगड़े हुए हाल पर हंस पड़ा। वो और बिगड़ा फिर से।

तो मैंने उसे समझाते हुए कहा — “अरे भाई, मैं बिल्कुल ठीक हूँ। और गबन, गुनाहों का देवता, अक्टूबर जंक्शन आदि — ये सब किताबों के नाम हैं। और मैं केवल तुम्हारे मज़े लेने के लिए ये प्रश्न पूछा था, और खूब मज़ा भी आया। उसने कहा — “अरे पागल, नहीं तो मैं किसी भी किताब के नाम कैसे जानूंगा? मैं थोड़े न पढ़ता हूँ ये सब। खैर वो सब छोड़ — तुझे ये किताबें, ग्रंथ, उपन्यास पढ़ने में क्या मज़ा आता है? क्या फायदे हैं इसके?”

Book Reading: और ये बड़ा अच्छा प्रश्न उसने पूछा था। खैर, उसके प्रश्नों का उत्तर मैंने उसे उसकी भाषा में दे दिया। पर ये विषय बड़ा आवश्यक प्रतीत होता है। यह छोटी-सी घटना मुझे यह सोचने पर मजबूर कर गई कि किताबें केवल पढ़ने का माध्यम नहीं, बल्कि समय, संस्कार और ज्ञान को जन–जन तक पहुँचाने का सबसे सशक्त साधन। आइए इस पर बात करते हैं — जानते हैं किताबों का महत्त्व।

Book Reading: क्या है किताब?

आइए सोचते हैं कि डार्विन की सेल थ्योरी जब किसी दूसरे व्यक्ति ने उनके बाद पढ़ी होगी तो कहाँ से पढ़ी होगी? या फिर कहें कि महाकवि तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना कैसे की ? इन सब चीजों के पीछे एक ही उत्तर आएगा — कि उन्होंने कहीं न कहीं से अध्ययन किया होगा, जिसे हम सामान्य भाषा में कह सकते हैं — किसी किताब से या किसी ग्रंथ आदि से। तो क्या है ये किताब? किताबें मनुष्य के जीवन की सबसे विश्वसनीय और स्थायी साथी हैं।

बदलते समय, तेज़ भागदौड़ और तकनीक की चमक के बीच भी किताबें वह शांति, गहराई और स्थिरता प्रदान करती हैं जो किसी और माध्यम से नहीं मिलतीं। किताबें हमें न सिर्फ़ जीवन के मौलिक अर्थ से अवगत कराती हैं बल्कि हमें ज्ञान अर्जित करने में भी सहायता प्रदान करती हैं। आप यूँ भी कह सकते हैं कि जहाँ से आप जीवन में अच्छी–बुरी विभिन्न चीज़ों के बारे में ज्ञान प्राप्त करते हैं और फिर आप उसके अच्छे भावों को अपना लेते हैं — वो किताब है।

Book Reading: जैसे एक छोटा बच्चा सीधे किताब नहीं पढ़ता। पहले बोलना सीखता है; उसे बोलना सिखाते हैं उसके माँ–बाप। तो उस वक़्त उस बच्चे के लिए उसके माँ–बाप एक किताब के ही समान हैं। वैसे सभी के लिए उनके माता–पिता एवं गुरु किताब के समान ही होते हैं। व्यक्ति जितना सीखना चाहे, उनसे सीखता है।

क्यों आवश्यक है किताबें पढ़ना?

किताबें केवल शब्दों का संग्रह नहीं होतीं, वे अनुभव, ज्ञान और जीवन की सीखों का ऐसा ख़ज़ाना हैं जो हमें बिना कहीं गए दुनिया की सैर करा देती हैं। किताबें हमारा दृष्टिकोण व्यापक बनाती हैं, हमें सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता देती हैं। इन्हें पढ़ने से भाषा शैली सुधरती है, विचारों में परिपक्वता आती है और मन शांत होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि किताबें हमें स्वयं को समझने और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देती हैं।

Book Reading: बहुत से शोध में देखा गया है कि किताबों से दूर रहने वाले व्यक्ति के मुकाबले वह व्यक्ति ज़्यादा स्वस्थ और खुश रहता है जो किताबें या किसी ग्रंथ, उपन्यास आदि से जुड़ा हो और रोज़ कुछ न कुछ पढ़ता हो।

किताबें पढ़ने का यह अर्थ नहीं कि हम दैनिक अध्ययन या कोर्स की किताब पढ़ लें और ‘पढ़ लिया’ कह दें, बल्कि हमें इसके अलावा यहाँ से हटकर भी कुछ पढ़ना चाहिए। यहाँ तक कि डॉक्टर भी हर व्यक्ति को रोज़ 30 मिनट रीडिंग करने का सुझाव देते हैं। आप बिना किसी उद्देश्य के भी कोई किताब पढ़ना शुरू कर सकते हैं। सम्भवतः एक अच्छी किताब आपको अंत में स्वयं उद्देश्य प्रदान कर देगी।

किताबों के प्रकार कितने होते हैं?

Book Reading: किताबों के प्रकार बहुत विस्तृत और विविध होते हैं, इसलिए इन्हें समझने के लिए हम उन्हें कुछ प्रमुख आधारों पर बाँट सकते हैं। सबसे पहले, विषय के आधार पर किताबें कई रूपों में मिलती हैं—जैसे साहित्य, जिसमें कविता, कहानी, उपन्यास शामिल हैं: वहीं विज्ञान एवं तकनीक की किताबें हमें आधुनिक ज्ञान देती हैं।

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इतिहास, दर्शन, मनोविज्ञान, राजनीति, धर्म–अध्यात्म और व्यवसाय–अर्थशास्त्र जैसे विषयों पर लिखी पुस्तकें भी अलग-अलग ज्ञान क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसके बाद, किताबें उनके उद्देश्य के आधार पर भी विभाजित की जाती हैं। कुछ किताबें केवल मनोरंजन के लिए लिखी जाती हैं, कुछ ज्ञान बढ़ाने के लिए। कई पुस्तकें प्रेरणा और व्यक्तित्व विकास में सहायक होती हैं, जबकि कुछ विशेष रूप से परीक्षाओं या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बनाई जाती हैं।

किताबों का एक तीसरा महत्वपूर्ण वर्ग शैली के आधार पर है, जिसमें फिक्शन यानी कल्पना आधारित रचनाएँ और नॉन-फिक्शन यानी वास्तविक घटनाओं पर आधारित पुस्तकें शामिल होती हैं। इसके अलावा जीवनी, संस्मरण, नाटक और निबंध-संग्रह जैसी शैलियाँ साहित्य को और भी समृद्ध बनाती हैं। इस प्रकार देखा जाए तो किताबों के प्रकार इतने व्यापक हैं कि हर पाठक अपनी रुचि और आवश्यकता के अनुसार सही पुस्तक चुन सकता है।

कैसी किताबों से हमें जुड़ना चाहिए?

Book Reading: वैसे तो हर व्यक्ति की अपनी रुचि अलग होती है, लेकिन कुछ प्रकार की किताबें सभी के जीवन में आवश्यक मानी जाती हैं। आध्यात्मिक और धार्मिक किताबें – मन की शांति और नैतिकता सिखाती हैं (गीता, रामायण, उपनिषद, बाइबिल, कुरान आदि)। ज्ञानवर्धक किताबें – विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र, समाज आदि को समझने में मदद करती हैं।

प्रेरणादायक किताबें – जीवन में आगे बढ़ने, लक्ष्य पाने और हार न मानने की शक्ति देती हैं। जीवनी एवं आत्मकथाएँ – महान लोगों के संघर्ष और सफलता से प्रेरणा मिलती है। साहित्यिक किताबें – कविता, कहानियाँ, उपन्यास—ये संवेदनशील बनाती हैं और मन को पोषित करती हैं।

किताबे पढ़ने की आदत कैसे बनाई जा सकती है?

Book Reading: कुछ भी पढ़ने की या कोई भी कार्य करने की आदत अचानक नहीं बनती, बल्कि इसे धीरे-धीरे विकसित करना पड़ता है। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है कि शुरुआत छोटी करें—रोज़ केवल 10–15 मिनट पढ़ें और समय को धीरे-धीरे बढ़ाएँ। शुरुआत में वही किताबें चुनें जो आपकी रुचि की हों, जैसे कहानी, उपन्यास, जीवनी या कॉमिक्स, क्योंकि दिलचस्प किताबें ही पढ़ने की आदत बनाने में सबसे अधिक मदद करती हैं।

पढ़ने के लिए समय निकालने का एक सरल तरीका यह भी है कि मोबाइल या सोशल मीडिया पर सिर्फ 15 मिनट कम दें; उतने समय में आप रोज़ 10 पन्ने आसानी से पढ़ सकते हैं। अपने लिए छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करना भी आवश्यक है—जैसे एक महीने में एक किताब पूरी करना, हर दिन 20 पन्ने पढ़ना या सप्ताह में किसी एक अध्याय को खत्म करना। साथ ही, पढ़ने के लिए शांत जगह, हल्की रोशनी और आरामदायक सीट का प्रबंध करने से पढ़ने का अनुभव और बेहतर होता है।

पढ़ते समय अगर आप महत्वपूर्ण बातों को अंडरलाइन करें, नोट्स बनाएं या कुछ पंक्तियाँ अलग से लिख लें, तो पढ़ना न सिर्फ रोचक होता है बल्कि याद भी अधिक रहता है। इस तरह छोटे-छोटे कदम मिलकर धीरे- धीरे पढ़ने को जीवन की आदत बना देते हैं।

Book Reading: वर्तमान आधुनिक युग में आप पढ़ने के लिए डिजिटल ई-बुक्स की भी सहायता ले सकते हैं, किन्तु किताबें बिना स्क्रीन के असल में ही पढ़ी जाये तो बेहतर है। आप अपने पढ़ने की आदत को और भी रोचक बना सकते हैं, अपने दोस्तों से जो किताब पढ़ रहे है उसके बारे में साझा करके। या फिर ऐसे ग्रुप्स या रीडिंग क्लब जॉइन कर सकते हैं जिससे यह और भी रोचक हो जाए ।

वर्तमान में पाठकों में रुचि ?

Book Reading: वैसे तो वर्तमान का जो समय है वह टेक्नोलॉजी का है, जिसमे व्यक्ति चाहता है कि मेहनत न करनी पड़े और काम हो जाये, पर कोई भी पढ़ने, लिखने और सीखने से जुड़ा हुआ कार्य आपका वक्त मांगता है। और आज के अधिकांश लोग लगे रहते हैं फ़ोन पर, कुछ तथ्यों के अनुसार विश्व में 30% लोग रोज़ पढ़ते हैं, 59% लोग हफ्ते में कम-से-कम एक बार पढ़ते हैं, और लगभग 6–31% लोग बहुत कम पढ़ते हैं या कभी नहीं पढ़ते।

ख़ैर रोज पढ़ने वालों की संख्या कम है और दरों में गिरावट इस बात का संकेत देती हैं कि पढ़ने की आदत “मनोरंजन” एवं मन की शांति के लिए कम हो रही है और डिजिटल सामग्री (एप, सोशल मीडिया) अधिक प्राथमिकता पाने लगी है, लेकिन यह सोशल मीडिया किताबों के सामने तनिक भी लाभकारी नहीं है । लेकिन फिर भी बाकी देशों के मुकाबले भारत में लगभग 60% से अधिक लोग “किसी न किसी रूप में किताब पढ़ते। विश्व का दूसरा सबसे बड़ा अंग्रेज़ी-पुस्तक बाज़ार भारत ही है।

Book Reading: भारत में किताबों की बिक्री हर वर्ष 20–25% बढ़ रही है। ये इस लिए भी हो सकता है क्यूंकि भारत एक साहित्यिक प्रधान देश भी है। भारत में इस फ़ोन आदि के बाद भी देखा जा सकता है की आज भी लोगों में पढ़ने की लालसा है । लोग किताबों से किसी उत्सव के समान जुड़ते हैं और जुड़ते जा जुड़ रहे हैं। देखा जा रहा है की पुरे तो नहीं पर कुछ हद तक नई युवा युग के बच्चे और विभिन्न प्रोफेशन में कार्यरत जवान एवं अधिक उम्र के लोग आज कल किताबों से जुड़ रहें हैं।

चाहे फिर वो अंग्रेजी की कोई फ़िलॉसॉफ़िकल या मोटिवेशनल किताब से जुड़े, या हिन्दी के किसी उपन्यास से जुड़ें या फिर भगवत गीता, रामायण आदि से। पर लोग बीते कुछ वर्षों के मुकाबले अभी अधिक जुड़ रहे हैं। उनके जुड़ने में कहीं न कहीं सोशल मीडिया में कुछ लोगों के द्वारा किताब एवं किताब पढ़ने को प्रमोट करना भी एक मुख्य कारण है, जिसे देख कर लोगों ने बड़ी तेजी से अपनाया है, आख़िर लोग जो देखते हैं चमक दमक भरी पोस्ट में उसे अपना ही लेते हैं, यहां भी कुछ वैसा ही हुआ ख़ैर अच्छा
हुआ।

स्वास्थ एवं सेहत पर क़िताब पढ़ने का पॉजिटिव असर होता है

Book Reading: अधिकतर हम कई बार फिल्मों में देखतें हैं कि अगर कोई मरीज़ हॉस्पिटल में एडमिट हो या बीमार हो तो वो किताब पढ़ते दिखाई देता है, इसे देख कर आम भारतीय नागरिक यही सोचता होगा के हॉस्पिटल में फोन चलाना मना है तो बेचारा किताब पढ़ रहा है। ख़ैर, ऐसा कुछ भी नहीं होता है। क़िताब पढ़ना एक बीमार और सामान्य व्यक्ति-दोनों के लिए लाभ-दायक ही है स्वास्थ्य में फायदे के लिए सोच कर देखें तो।

स्वास्थ्य एवं सेहत पर किताब पढ़ने का प्रभाव मेडिकल साइंस (Neuroscience, Psychology, Psychiatry) के अनुसार अत्यंत गहरा और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है। पढ़ना केवल “ज्ञान” नहीं बढ़ाता, बल्कि शरीर व मन—दोनों को स्वस्थ रखने में प्रत्यक्ष रूप से भूमिका निभाता है। कई मेडिकल रिसर्च में पाया गया है कि किताब पढ़ना तनाव को 60–68% तक कम कर देता है।

जब हम पढ़ते हैं, हमारा मस्तिष्क अल्फ़ा ब्रेन वेव्स उत्पन्न करता है—यही वे तरंगें हैं जो मेडिटेशन और शांत संगीत में बनती हैं। मानसिक स्वास्थ्य में सुधार एवं मानसिक स्थिर्ता के लिए भी यह लाभ दायक है। साइकोलॉजी के अनुसार अवसाद, चिंता, अकेलापन और नकारात्मक सोच जैसी समस्याओं के विरुद्ध इसे बहुत प्रभावी पाया गया है, कई देशों में “Reading Therapy” या “Bibliotherapy” का उपयोग मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए किया जाता है।

Book Reading: जिन्हें नींद की तकलीफ हो उनके लिए तो यह आदत रामबाण समान है, व्यक्ति अधिक Overthinking करता है, डरता है, नींद कम आती है, किताब पढ़ना इन समस्याओं को कम कर देता है, नर्वस सिस्टम को शांत करता है, और रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होती है। ऐसा भी देखा गया है की जो किताबें पढ़ते हैं उनका याददाश्त अधिक बेहतर होता है, न्यूरोलॉजी के अनुसार, नियमित पढ़ने वाले लोगों का ब्रेन ऐज धीमे बढ़ता है। यानि उनका दिमाग अधिक समय तक जवान रहता है।

किताबें पढ़ने से कॉग्निटिव रिज़र्व बढ़ता है, जो बुढ़ापे में डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियों के जोखिम को कम करता है। जो आपके सोच-विचार की शक्ति को भी बढ़ता है। तो सभी तथ्यों के अनुसार और मेडिकल के अनुसार भी यह आदत लाभदायक ही है इसे आपको अपनाना चाहिए ।

आध्यात्मिक ग्रंथ (गीता, उपनिषद, बुद्ध-वचन), जीवन-प्रेरणा की किताबें, उपन्यास, कहानियाँ, हास्य, साहित्य, जीवनियाँ, प्रकृति और मनोविज्ञान आदि पर आधारित किताबें आप पढ़ें और अपने समीप के लोगों को भी पढ़ाएं बहुत सी चीजें सुधर जाएँगी। तो आखिर एक सवाल ने मुझे यह लेख लिखने के लिए प्रेरित किया, शायद ऐसा न होता अगर मैं ऐसे
अजीब से दार्शनिक सवाल न पूछता।

Book Reading: हमने जाना कि किताबें क्यों ज़रुरी है और उसके क्या फ़ायदे हैं। तो सोचिए मत आप भी किसी नई किताब संग एक नए सफ़र में निकल जाइये एवं पढ़ना शुरू कर दीजिये। क्योंकि किताबें धीरे-धीरे हमारे भीतर एक ऐसी आंतरिक शक्ति, संवेदनशीलता और समझ विकसित करती हैं जो किसी दवा, किसी तकनीक या किसी मनोरंजन माध्यम से नहीं मिल सकती। इसलिए किताबें केवल पढ़ने की वस्तु नहीं—वे मनुष्य के विकास, स्वास्थ्य, आनंद, सभ्यता और आत्मिक उन्नति की सबसे विश्वसनीय साथी हैं।

किताबें समय के बीतते हुए प्रवाह में एक ऐसा दीया है जो पीढ़ियों को रोशन करती रहती हैं। जो व्यक्ति किताबों से जुड़ता है, वह स्वयं को बेहतर समझता है और दुनिया को अधिक सुन्दर, अधिक मानवीय और अधिक अर्थपूर्ण नज़र से देख पाता है।

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