चौपाल सियापा; 23 मार्च । Chaupal Siyapa apheem : धान का कटोरा अब नई फसल उगा रहा है नाम है “अफीम”। फर्क बस इतना है कि यह पेट नहीं, पीढ़ियां खा रही है। छत्तीसगढ़ की पहचान धान की खुशबू से होती है, लेकिन अब खबरों की मिट्टी में अफीम की अवैध खेती उगता दिख रहा है। दुर्ग, बलरामपुर, रायगढ़, लैलूंगा—मानो नक्शे पर नई “खेती” के हरे धब्बे बनते जा रहे हैं। और हम सब इस हरियाली को देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं, क्योंकि यह हरियाली थोड़ी “नशेड़ी” है।
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Toggleधान का कटोरा या अफीम का कटोरा
Chaupal Siyapa apheem : छत्तीसगढ़ में अफीम की अवैध खेती के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। तमनार के बाद अब रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र अंतर्गत घटगांव में भी अफीम की खेती पकड़ी गई है। जानकारी के अनुसार, लैलूंगा थाना क्षेत्र के घटगांव गांव में सब्जियों की बाड़ी के बीच अफीम की खेती छिपाकर की जा रही थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। फिलहाल कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
पिछले दो सप्ताह के भीतर राज्य में अफीम की अवैध खेती का यह पांचवां मामला है, जबकि बीते दो दिनों में रायगढ़ जिले में यह दूसरा मामला सामने आया है। पुलिस द्वारा मामले की गहन जांच की जा रही है और इसमें शामिल लोगों की पहचान कर जांच शुरू कर दी है और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

जब रखवाले ही खेत चरने लगें: अफीम की जड़ें और गहरी
Chaupal Siyapa apheem : यह कोई संयोग नहीं, कोई एक दिन का प्रयोग नहीं। अफीम कोई घास-फूस नहीं जो अपने आप उग जाए। इसके लिए जमीन चाहिए, सुरक्षा चाहिए, और सबसे जरूरी—“सहयोग” चाहिए। और यही सहयोग सबसे बड़ा रहस्य भी है और सबसे खुला सच भी। जब रखवाले ही खेत चरने लगें: अफीम की जड़ें और गहरी हो जाती है।
सरकार कहती है, “हम नशे के खिलाफ सख्त हैं”
और जमीन कहती है, “फसल तो ठीक-ठाक बढ़ रही है”
Chaupal Siyapa apheem : बड़े राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के नाम जब ऐसे मामलों में सामने आते हैं, तो सवाल सिर्फ व्यक्ति पर नहीं,
पूरी व्यवस्था पर खड़ा होता है। लेकिन राजनीति का अपना गणित है सत्ता में रहो तो “कार्रवाई जारी है”,
विपक्ष में आओ तो “सरकार विफल है”।
Chaupal Siyapa apheem : और सच ? वह दोनों के बीच कहीं अफीम की तरह घुलकर गायब हो जाता है।
विपक्ष को मुद्दा मिल गया है, सत्ता को सफाई का मौका। लेकिन जनता?
वह हर दिन एक नया आंकड़ा गिन रही है नशे में डूबते बच्चे, बढ़ती हिंसा, और घरों में पसरी खामोशी।
Chaupal Siyapa apheem : अफीम की हरियाली : चुप्पी की सबसे खतरनाक फसल
सबसे भयावह दृश्य यह नहीं कि अफीम की खेती हो रही है।
सबसे डरावना यह है कि अब नशा खेतों से निकलकर गलियों में आ गया है
जहां मासूम बच्चे “खेलने” की उम्र में “हथियार” उठाने लगे हैं।
यह वही समाज है जो कभी बच्चों को “किताब” देता था,
अब “नशा” और “डर” दे रहा है।
और हम?
हम अभी भी बहस में व्यस्त हैं
किसकी सरकार ज्यादा नाकाम रही।
असल सवाल कोई पूछ ही नहीं रहा
जब पूरी पीढ़ी नशे की गिरफ्त में आ जाएगी,
तब राजनीति किसके लिए बचेगी?
यहां अब फसल धान की नहीं,
“खामोशी” की कटाई हो रही है।
क्योंकि हर कोई जानता है,
पर कोई बोलता नहीं।

