जिस कर्म में फल की आकांक्षा ना रह जाए वही वास्तव में कर्म है

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur

रतनपुर:12/03/2026: Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur: परम पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) ने आज श्रीमद् भागवत कथा में राजा परीक्षित की कथा सुनाई,परीक्षित जी को जब पता चलता है की उनकी मृत्यु सात दिन के अंदर होने वाली है, परीक्षित जी तुरंत राज्य जनमेजय को देकर राज-पाठ छोड़ देते हैं और कमंडल लेकर गंगा नदी के किनारे चले जाते है।

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur: मृत्यु सात दिन में होने वाली हो जो मरणासन में हो उसे कौन- सा कर्म करना चाहिए?

वहाँ जिज्ञासा पूर्वक प्रश्न करते है, सुकदेव जी से पूछते हैं कि जिनकी मृत्यु सात दिन में होने वाली हो जो मरणासन में हो उसे कौन- सा कर्म करना चाहिए? हम सब की मृत्यु सात दिन के अंदर ही होती है लेकिन हम यह कभी नहीं पूछ पाते कि हमें कौन – सा कर्म करना चाहिए ?

परीक्षित जी को समय मिला है, जब की हम कभी भी जा सकते हैं।  हम सब मरणासन में होते हैं लेकिन अपने में व्यस्त जीवन में होते हैं, जो हमारा कर्तव्य है उसी को हम कर्म समझ लेते हैं जबकि भगवान कहते हैं जीविकोपार्जन करना,बच्चो का पालन- पोषण करना ये हमारा कर्तव्य होता है। 

कर्म की गति इतनी गहन है कि ज्ञानी भी इसे नही समझ पाता

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur: गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते है कि कर्म की गति इतनी गहन है कि ज्ञानी भी इसे नही समझ पाता,जब हम जन्म लेते है तो परमात्मा के प्रति गुरु के प्रति समाज के प्रति सबके प्रति हमारा कर्म निर्धारित होता है।

सतोगुणी , तमोगुणी और रजोगुणी यह तीन प्रकार के भाव से कर्म की जाती है लेकिन हमेशा सात्विक कर्म करना चाहिए।जिस कर्म में राग -द्वेष से मुक्ति मिल जाय वही कर्म है, जिस कर्म में फल की कोई आकांक्षा ना रह जाए वही वास्तविक कर्म होता है वह विशुद्ध कर्म होता है,जिस कर्म में आसक्ति लोभ की वृत्ति न हो,वह कर्म है।

कर्म के आधार पर अपने भाग्य को बदलना संभव है 

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur: जब कर्म की पराकाष्ठा होती है और फल की आकांक्षा नहीं होती है तो जीवन में विधाता ने अगर कुछ ऐसा लिख भी दिया है वह भी बदल जाता है, कर्म के आधार पर अपने भाग्य को आप बदल सकते हैं, कर्म के आधार पर अपने भाग्य को फिर से लिख सकते हैं लेकिन प्रयास नहीं किया जाता है, वैसा कर्म नहीं कर पाते है ।

कथा में उन्होंने कहा, फल की आकांक्षा से मुक्त होकर के भगवान में भक्ति और चेतना स्थापित करके अनन्य भाव से भगवान की भक्ति करते हुए और कर्म लीनता से सरलता पूर्वक कर्म करने पर हम अपने किस्मत को लिख सकते है, भाग्य को लिख सकते है, भाग्य में लिखा हुआ भी मिटा सकते है ।

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur:  भगवान की लीला और भगवत कथा सुनने काफी संख्या में लोगों की भीड़ रही, कथा के आयोजक श्रीमती सावित्री संतोष गुप्ता ने बताया कि कल पौने तीन बजे की आरंभ हो जाएगी।

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