रतनपुर: Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 3: परम पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) ने आज श्रीमद् भागवत कथा में कृष्ण जन्म की कथा कृष्ण अवतार की कथा बताएं देवकी अर्थात ईश्वर को ग्रहण करने वाली बुद्धि ,वासुदेव अर्थात हमारे भीतर की सद्गुण।
Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 3: जब सद्गुण और सद्बुद्धि एक साथ होते है तब भगवान का दर्शन होता है
जब सद्गुण और सद्बुद्धि एक साथ होते है तब भगवान का दर्शन होता है। भगवान अवतार लेते है । ईश्वर को ग्रहण करने वाली बुद्धि और सद्गुण जब दोनों का मेल होगा तब जाकर भगवत दर्शन प्राप्ति होती है और इस रूप में वासुदेव और देवकी है ,भगवान कृष्ण जेल में प्रकट होते है ।
औ उसे वासुदेव सुप में रखकर सिर पर धारण करके नंद बाबा के यहां ले जाते हैं आगे कथा में यह बताएं कि इस समय जेल में पूरी बेड़िया अपने आप खुल जाती है और रास्ते बन जाते हैं सूप का अर्थ गुरुदेव बताएं कि जो अच्छी चीजों को अपने पास रखकर बेकार की चीजों को बाहर कर दे जब सिर पर भगवान को धारण करते हैं तो सारे रास्ते अपने आप बनने लग जाती है।
Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 3: भगवान को धारण करते ही वासुदेव की बुद्धि निर्मल हो गई शुद्ध हो गई अंदर की जितनी गांठे थी सबके सब खुल गई मुक्त हो गए जब भगवान की कृपा भगवान का चरण जब सर पर लग जाए तो समस्त प्रकार की बेड़ीया खुल जाती है ,अपने आप की, माया की ,ईर्ष्या की, पाखंड की, धन की, अहंकार की ,लालच की, जाति की , ऊंच -नीचे की ,छुआ छूत की, सारी गाठे अपने आप खुल जाती है मुक्त हो जाता है ।
जब भगवान को धारण करेंगे तब आपने आप रास्ता बन जाता है। विघ्न दूर हो जाते है।बड़ी बाजार पंडाल में काफी संख्या में लोगों की भीड़ रही कथा आयोजक श्रीमती सावित्री संतोष गुप्ता ने बताया कि कल 3:45 बजे कथा आरंभ हो जाएगी कृष्ण लीला की कथा बताई जाएगी।

