चौपाल सियापा : नक्सलवाद “समाप्ति” पर “नूरा कुश्ती” श्रेय का खेल ! “ राव साहब रुकेंगे… या कुर्सी नया ठिकाना ढूंढेगी  ?” जो सचिव, वही अध्यक्ष… या इस बार कहानी में ट्विस्ट ?

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चौपाल सियापा; 5 अप्रैल । chaupal siyapa Naxalvad :  इस बार के चौपाल सियापा में मुद्दा गंभीर है, लेकिन अंदाज़ वही चुटीला नक्सलवाद और उस पर सियासत का खेल। कहते हैं, नक्सलवाद अब खत्म होने की कगार पर है… मगर सवाल यह है—क्या सच में आग बुझ गई है, या बस राख के नीचे सुलग रही है ? क्योंकि बस्तर की कहानी में “समाप्ति” शब्द जितना आसान लगता है, ज़मीनी हकीकत उतनी ही उलझी हुई है।

अब बात सियासत की जहां होना तो यह चाहिए कि पक्ष और विपक्ष दोनों एक मंच पर आकर इस दशकों पुराने जख्म को भरने की कोशिश करें। लेकिन यहां तो “नूरा कुश्ती” चल रही है बाहर बयानबाज़ी, अंदर रणनीति। कोई कह रहा है “हमने खत्म किया”, तो कोई कह रहा है “हमारे समय में कम हुआ”।  यानी मुद्दा वही, श्रेय का खेल अलग-अलग।

chaupal siyapa Naxalvad : सवाल ये भी है कि क्या सियासतदारों को सच में देश और समाज की चिंता है, या फिर नक्सलवाद भी अब एक “राजनीतिक टूल” बन चुका है? क्योंकि जब बस्तर धीरे-धीरे मुख्यधारा की ओर लौट रहा है, तब भी बयान ऐसे आते हैं जैसे कुर्सी का नया ठिकाना तय करना ज्यादा जरूरी हो।

सुदूर बस्तर, जो दशकों तक हिंसा का दंश झेलता रहा, आज अगर बदलने की कोशिश कर रहा है, तो उसका स्वागत होना चाहिए—ना कि उस पर सियासी ठप्पा।

chaupal siyapa Naxalvad : चौपाल का निष्कर्ष साफ है ! नक्सलवाद खत्म हो या ना हो,
लेकिन सियासत का ये खेल खत्म होना ज़रूरी है… वरना चिंगारी कहीं ना कहीं सुलगती ही रहेगी…….

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राव साहब रुकेंगे…  या कुर्सी नया ठिकाना ढूंढेगी   ?”

chaupal siyapa Naxalvad : छत्तीसगढ़ के वन महकमे में इन दिनों बड़ी “शांत हलचल” चल रही है। बाहर से सब कुछ हरा-भरा और सामान्य दिख रहा है, लेकिन अंदर फाइलों के पत्ते तेजी से खड़क रहे हैं। मामला है पीसीसीएफ और हेड ऑफ फॉरेस्ट श्रीनिवास राव के रिटायरमेंट का… और उससे भी ज्यादा उनके “संभावित एक्सटेंशन” का। अब सरकारी दफ्तरों में एक्सटेंशन कोई नई चीज नहीं, लेकिन यहां मामला थोड़ा “जंगल राज” टाइप सस्पेंस वाला हो गया है।

जंगल में जैसे एक ही शेर ज्यादा समय तक रहे तो बाकी जानवरों की उम्मीदें ठंडी पड़ जाती हैं, वैसे ही अगर एक्सटेंशन मिल गया तो लाइन में खड़े अफसरों की फाइलें फिर से “वेटिंग” में चली जाएंगी।

chaupal siyapa Naxalvad : इस दौड़ में आईएफएस अरुण पाण्डेय और ओ.पी. यादव के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। यानी अगर एक्सटेंशन नहीं हुआ, तो कुर्सी सीधे “अंबिकापुर एक्सप्रेस” पकड़ सकती है। लेकिन कहानी में ट्विस्ट भी है कहा जा रहा है कि दो में से एक नाम पर मंत्री जी की नजरें थोड़ी “टेढ़ी” हैं। अब ये टेढ़ापन किस बात का है, ये फाइलें भी खुलकर नहीं बता रहीं।

जंगल में सन्नाटा जरूर है, लेकिन अंदर की राजनीति पूरी तरह “वाइल्ड” चल रही है ;  कुल मिलाकर, वन विभाग में इस समय पेड़ों से ज्यादा चर्चाएं बढ़ रही हैं। सबकी नजर एक ही बात पर है

राव साहब रुकेंगे या कुर्सी नया ठिकाना ढूंढेगी   ?”

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नक्सलवाद पर सियासत तेज…. रमन सिंह का तंज कीचड़ उछालने से दाग नहीं छिपते

chaupal siyapa Naxalvad : नक्सलवाद के खात्मे के श्रेय को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयान के बाद कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया के जरिए बहस की चुनौती दी, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने पलटवार किया। रमन सिंह ने अमित शाह को “साध्य पुरुष” बताते हुए नक्सलवाद से मुक्ति पर आभार जताया। उन्होंने पत्र में कहा कि 31 मार्च 2026 देश के लिए ऐतिहासिक दिन है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह संभव हुआ।

वहीं, रमन सिंह ने भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए उनके कार्यकाल में सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप करने का आरोप लगाया। नक्सलमुक्ति के मुद्दे पर अब प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।

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chaupal siyapa Naxalvad : बघेल ने शाह को ललकारा

नक्सलवाद को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के लोकसभा में दिए बयान पर कड़ा पलटवार किया है। भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो जारी कर अमित शाह पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और उन्हें खुली बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार हमेशा नक्सलवाद के खिलाफ मजबूती से लड़ी है।

chaupal siyapa Naxalvad : बघेल ने दावा किया कि उनकी सरकार ने दो रणनीतियों पर काम किया—पहली, बस्तर के लोगों का विश्वास जीतना और दूसरी, नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्य करना। उन्होंने कहा कि वन अधिकार पट्टे, स्कूल, इलाज और राशन जैसी सुविधाएं देकर लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा गया, जिससे नक्सलवाद कमजोर हुआ।

साथ ही बघेल ने BRG जवानों की शहादत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनके बलिदान के कारण ही नक्सलवाद खत्म होने की स्थिति में पहुंचा है। उन्होंने अमित शाह से इस बयान पर माफी मांगने की मांग भी की। गौरतलब है कि लोकसभा में अमित शाह ने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा और देरी का कारण राज्य में कांग्रेस सरकार रही। इस बयान के बाद प्रदेश में सियासी विवाद और गहरा गया है।

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जो सचिव, वही अध्यक्षया इस बार कहानी में ट्विस्ट ?

chaupal siyapa Naxalvad : छत्तीसगढ़ में इन दिनों जंगल से लेकर “पर्यावरण” तक सब कुछ चर्चा में है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल का अध्यक्ष कौन बनेगा यह सवाल अब पेड़ों की पत्तियों से ज्यादा हवा में तैर रहा है।

फिलहाल तो व्यवस्था ऐसी है कि पर्यावरण सचिव ही इस कुर्सी पर बैठते हैं, यानी परंपरा साफ है“जो सचिव, वही अध्यक्ष।” लेकिन इस बार कहानी में थोड़ा सस्पेंस है। चर्चा है कि एक वरिष्ठ आईएफएस अफसर का नाम भी तेजी से घूम रहा है। अब ये नाम हवा में ही रहेगा या कुर्सी तक पहुंचेगा ।

उधर वन विभाग में पहले से ही सवाल गूंज रहा है
“राव साहब रुकेंगे… या कुर्सी नया ठिकाना ढूंढेगी?”
और इधर पर्यावरण मंडल में नया सवाल जुड़ गया
“परंपरा चलेगी… या बदलाव आएगा ?”

chaupal siyapa Naxalvad : कहते हैं कि इस नियुक्ति में  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  और  ओपी चौधरी  की पसंद काफी मायने रखेगी। यानी फाइलें सिर्फ कागज नहीं, “पसंद-नापसंद” के तराजू पर भी तौली जाएंगी। पर्यावरण बचाने वाली संस्था का अध्यक्ष कौन होगा, ये तय होने में भी “राजनीतिक तापमान” थोड़ा ज्यादा ही बढ़ गया है।

अब देखना दिलचस्प होगा
यह कुर्सी परंपरा की ठंडी छांव में ही रहेगी…
या बदलाव की नई धूप में चमकेगी !  


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