गांधीनगर, 24 मई। swad ka raja kesar aam : भारत फलों की विविधता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, लेकिन जब बात आम की आती है तो गुजरात का केसर आम और महाराष्ट्र का हाफूस विशेष पहचान रखते हैं। इन दोनों किस्मों की मिठास, सुगंध और स्वाद ने विदेशों तक भारतीय फलों का परचम लहराया है। खासकर गुजरात का केसर आम आज “स्वाद का राजा” बनकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
केसर आम की सुगंध से लंदन का हीथ्रो एयरपोर्ट महक उड़ा
swad ka raja kesar aam : भारत के केसर और हाफूस आम जैसी सुगंध और मिठास पूरी दुनिया में कहीं और नहीं है। भारत का केसर आम तो ‘स्वाद का राजा’ है। सात समंदर पार गुजरात के आम का दबदबा देखते बनता है। केसर आम की सुगंध से लंदन का हीथ्रो एयरपोर्ट महक उड़ा और भारत सहित पूरी दुनिया में आम की अनेक किस्में मिलती हैं, लेकिन विदेशियों को केवल गुजरात का केसर आम और महाराष्ट्र का हाफूस ही अधिक पसंद है।
swad ka raja kesar aam : गुजरात के जूनागढ़ और गिर क्षेत्र में पैदा होने वाला केसर आम अपनी अनोखी खुशबू और गहरे केसरिया रंग के कारण दुनिया भर में लोकप्रिय है। इसका नाम भी इसके रंग के कारण “केसर” पड़ा। जैसे ही यह आम पकता है, इसकी मीठी सुगंध दूर तक फैल जाती है। यही कारण है कि विदेशों में इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

केसर आम की खेती गुजरात के किसानों के लिए आय का बड़ा साधन
swad ka raja kesar aam : केसर आम की खेती गुजरात के किसानों के लिए आय का बड़ा साधन बन चुकी है। आधुनिक खेती, बेहतर पैकेजिंग और निर्यात सुविधाओं ने किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ा है। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि “वोकल फॉर लोकल” और “मेक इन इंडिया” जैसी सोच को भी बल मिला है।
इंग्लैंड में केसर और हाफूस आम वतन की मीठी याद और खुशबू
swad ka raja kesar aam : इंग्लैंड में आमों का आयात करने वाले दिग्विजय सिंह गोहिल का कहना है कि जब लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर गुजरात से आए केसर और हाफूस आम के बॉक्स उतरते हैं और उनकी सुगंध पूरे कार्गो एरिया में फैलती है, तब एक भारतीय के रूप में मुझे बहुत ज्यादा गर्व महसूस होता है। उन्होंने कहा कि लंदन, लेस्टर और बर्मिंघम में रहने वाले गुजरातियों और भारतीयों के लिए यह केवल एक फल नहीं, बल्कि उनके वतन की मीठी याद और खुशबू है। लोग इसे मुंहमांगी कीमत पर खरीदने को तैयार होते हैं। अब तो यूरोपियन लोग भी ‘इंडियन मैंगो’ के दीवाने हो गए हैं।
swad ka raja kesar aam : गोहिल आगे बताते हैं कि भारत सहित पूरी दुनिया में आम की अनेक किस्में मिलती हैं, लेकिन गुजरातियों और विदेशियों को केवल गुजरात का केसर आम और महाराष्ट्र का हाफूस ही अधिक पसंद है। केसर आम की मांग सबसे अधिक है। भारत के केसर और हाफूस आम जैसी सुगंध और मिठास पूरी दुनिया में कहीं और नहीं है।
भारत का केसर आम तो ‘स्वाद का राजा’
swad ka raja kesar aam : ब्राजील और पेरू जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों के आम दिखने में तो सुर्ख लाल होते हैं, लेकिन उनका स्वाद काफी फीका होता है, जबकि भारत का केसर आम तो ‘स्वाद का राजा’ है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए-एपीडा) से मान्यता प्राप्त आम के बागों और मान्यता प्राप्त पैक हाउस में आम की प्रोसेसिंग करने के बाद ही उसका निर्यात किया जाता है। राजकोट के कुवाड़वा स्थित एपीडा से मान्यता प्राप्त कुंज कोल्ड वेयर सॉल्यूशन-पैक हाउस के मालिक समीर सापरिया ने बताया कि हम आम के निर्यात के लिए प्रोसेसिंग का काम अपने पैक हाउस में करते हैं। हम अमेरिका, इंग्लैंड, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय तथा खाड़ी के देशों की जरूरत के अनुसार आमों को प्रोसेस और पैक करते हैं।
swad ka raja kesar aam : अमेरिका को निर्यात करने के लिए हम विशेष प्रकार की हॉट वाटर प्रोसेस करते हैं, जिसे सबसे अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इंग्लैंड और कनाडा के लिए हॉट वाटर के अलावा राइपनिंग प्रोसेस करने के बाद उसकी पैकिंग की जाती है। हम केसर, राजापुरी और अल्फांसो (हाफूस) आम की भी प्रोसेसिंग करते हैं।
केसर आम जूनागढ़, तालाळा और कच्छ से आते हैं
swad ka raja kesar aam : केसर आम जूनागढ़, तालाळा और कच्छ से आते हैं, जबकि राजापुरी आम वलसाड से आते हैं। बाग से निकला आम कैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का ‘ग्लोबल प्रोडक्ट’ बनता है, यह प्रक्रिया भी रोमांचक है। डी-सेपिंग : जब आम ठीक तरह से पकने की अवस्था पर पहुंच जाते हैं, तब उन्हें सबेरे ठंडे वातावरण में तोड़कर पैक हाउस में लाने के बाद सबसे पहला काम डी-सेपिंग का होता है।
आमों को तोड़कर 48 से 52 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले गर्म पानी में लगभग 10 मिनट तक डूबाकर रखा जाता
swad ka raja kesar aam : आमों को स्पेशल कन्वेयर बेल्ट या ट्रे पर उल्टा रखा जाता है, ताकि डंठल का सारा रस निकल जाए। इससे आम काले नहीं पड़ते और लंबे समय तक खराब नहीं होते। हॉट वाटर ट्रीटमेंट : हरे आमों को तोड़कर 48 से 52 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले गर्म पानी में लगभग 10 मिनट तक डूबाकर रखा जाता है। इस प्रोसेस से आम में होने वाला ‘एन्थ्रेक्नोज’ (एक रोग जिसमें आम पर काले धब्बे पड़ जाते हैं) और सड़न पैदा करने वाले फंगस खत्म हो जाते हैं, साथ ही फल मक्खी के अंडे और इल्ली मर जाते हैं। गर्म पानी के कारण आम के अंदर प्राकृतिक ‘एथिलीन’ गैस सक्रिय हो जाती है, जिससे सभी आम एक साथ और एक समान रूप से पकते हैं।
swad ka raja kesar aam : हाइड्रो-कूलिंग : गर्म पानी से निकाले गए आमों को 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान वाले ठंडे पानी में 10 मिनट के लिए रखा जाता है। इसके बाद उन्हें हवा में अच्छी तरह से सुखाया जाता है। ठंडक के कारण आम की श्वसन दर (रेस्पिरेशन रेट) धीमी पड़ जाती है, जिससे आम लंबे समय तक ताजा रहता है, उसके छिलके सख्त रहते हैं और पकने के बाद उनका रंग बहुत ही आकर्षक और पीला दिखाई देता है।
केसर आम आज एक वैश्विक ब्रांड
swad ka raja kesar aam : पैक हाउस ओनर समीर सापरिया ने बताया, ”जब प्रोडक्ट में दम हो और उसे आधुनिक तकनीक का साथ मिले, तो दुनिया भर में प्रतिष्ठा हासिल की जा सकती है। गिर के बागों से निकला केसर आम आज एक वैश्विक ब्रांड बन चुका है।” किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से किसान आम को स्वयं अपने तरीके से सीधे विदेश में निर्यात करके डॉलर और पाउंड में कमाई कर सकते हैं।
सरकार की ओर से विभिन्न प्रकार की सब्सिडी
swad ka raja kesar aam : यदि किसान अपना समूह या एफपीओ बनाकर एक समान उत्पादन और निर्यात करें, तो सरकार की ओर से विभिन्न प्रकार की सब्सिडी और सहायता दी जाती है। सापरिया ने कहा कि इसके लिए यदि किसी किसान को मदद या मार्गदर्शन की जरूरत होगी, तो उन्हें पूरी मदद और मार्गदर्शन दिया जाएगा। निर्यातकों के अनुसार, केवल आम ही नहीं, बल्कि 2026 के मानसून के बाद यानी आगामी सितंबर महीने से जी-फोर मिर्च, भिंडी, करेला, तोरई और गिलकी जैसी गुजरात की प्रीमियम सब्जियां भी इसी आधुनिक प्रोसेसिंग के साथ विदेशी बाजारों में भेजने का भव्य आयोजन किया गया है।

